जियो और जीने दो
इस विश्व में लिया है जन्म जिसने,
उसे आज़ादी से दो रहने
यही है मानवता का सन्देश
जिसे फैलाया मानव ने जा देश-विदेश
फिर क्यूँ मानव ये भूल गया
किसी अन्य ने भी है जन्म लिया
जिससे उसकी आज़ादी ली छीन
दिखाया स्वयं को स्वार्थी और हीन
वनों को नष्ट कर बस्ती बना मानव बसा
वध कर वन जीवों का गर्वित हुआ और हंसा
प्रगति की होड़ में चलता गया, चलता गया
भविष्य कैसा होगा, ये उसको न ज्ञात हुआ
ज्वलंत प्रश्न है -
भावी पीड़ी का जीवन कैसा होगा ?
क्या उनके प्रश्नों का उत्तर हम पर होगा?